चोर-पुलिस मौसेरे भाई -- मुकेश जोशी.

चोर-पुलिस मौसेरे भाई -- मुकेश जोशी.

पने कैशोर्य में पिताजी और हम तीन भाइयों के बीच एक अदद साइकिल ही लोकल ट्रांसपोर्टेशन का इकलौता साधन हुआ करती थी, पिताजी अगर साइकिल लेकर निकललिए तो ज़ाहिर है हम भाइयों को 'पदयात्रा' ही करना पड़ती थी| उस दौर में टेम्पो तांगे भी 'अफोर्ड' नहीं कर सकते थे| बड़ा होने के नाते पिताजी के बाद साइकिल पर मेरा पहला हक़ बनता था, सो उसी हक़ के चलते एक बार साइकिल मेरे खाते में बाज़ार तो  गई पर घर वापस  नहीं आ सकी| मैं किराने की दूकान पर पुडियाएं बंधवाने में लगा रहा और मेरे नीचे से ही कोई हमारी इकलौती साइकिल सरका कर चल दिया|

ईश्वर : एक खोज . . . . . हे भगवन, ये जानकर बड़ी ही प्रसन्नता हुई कि अब आप भी 'आर टी आई' के घेरे में आ गए हैं -- मुकेश जोशी .

ईश्वर : एक खोज  -मुकेश जोशी

हे  भगवन, ये जानकर बड़ी ही प्रसन्नता हुई कि अब  आप भी 'आर टी आई' के घेरे में आ गए हैं आप पर भी 'सूचना का अधिकार' लागू  हो गया है, अब आपके बारे में भी जानकारी मांगी जा सकती है, आपको लेकर भी सवाल खड़े किये जा सकते हैं| अब आप भी क़ानून से बड़े और ऊपर नहीं हैं|

तुगलकी फरमान- मुकेश जोशी|


खुजली सरकार के तुगलकी फैसलों से दिल्ली वाले हैरान-परेशान हैं कि कारों के 'सम-विषम' नंबर एक दिन छोड़कर चलेंगी .....दिल्ली में ट्रेफिक की तरह ही 'इम्मोरल ट्रेफिक' तथा बलात्कार भी बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं ....इन्हें देखते हुए.कहीं 'खुजलीवालजी' यह मुनादी न करवा दें कि आगे से 'मर्द और औरतें' भी एक दिन छोड़कर घरों से निकलेंगे मतबल जिस दिन 'मरद' घर से बाहर निकला 'औरतें' घरों में जमा रहेंगी और 'औरतों' के भ्रमण दिवस पर 'मर्द' घर में बाल बच्चे खिलाएंगे....
यकीनन इस फैसले से छेड़छाड़ तो रुकेगी ही कुछ हद तक 'जनसँख्या नियंत्रण' भी संभव हो सकेगा ....
सो लेट यू ट्राय ईमानदार जी ....  मुकेश जोशी| 
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लेख विषयक प्रत्येक बात के लिए लेखक स्वयं उत्तर दाई है| संपादक. ============================================

अ. भा. कालिदास समारोह के संस्थापक - स्व. प. सूर्यनारायण व्यास आलेख -मुकेश जोशी

. भा. कालिदास समारोह के संस्थापक - स्व.. सूर्यनारायण व्यास,
 आलेख- मुकेश जोशी

भूतभावन भगवान् महाकालेश्वर की नगरी उज्जयिनी ----,

पुण्य सलिला क्षिप्रा नदी की नगरी उज्जयिनी ----,
योगेश्वर भगवान् श्रीकृष्ण की विद्यास्थली  उज्जयिनी ----,                               
न्यायप्रिय सम्राट विक्रमादित्य की नगरी उज्जयिनी ----,
योगीराज भर्तहरि की नगरी उज्जयिनी ----,
भगवान् श्रीकृष्ण को १६ कलाओं में पारंगत करने वाले महर्षि सान्दीपनि की नगरी उज्जयिनी...
उन्ही महर्षि सान्दीपनि के वंश में इस कलिकाल में ही एक और प्रखर ज्योतिपुंज उत्पन्न हुए संसार भर को रात्रि की कालिमा से भोर में अपने उजास से प्रकाशित करने वाले भगवान् भुवन भास्कर सूर्यनारायण की तरह ही प्रखर तेजस्वी बालक ने जन्म लिया...
प्रकांड विद्वान् महर्षि नारायणजी व्यास के यहाँ -----

जिसका चारा उसकी भैंस -मुकेश जोशी


जिसका चारा उसकी भैंस -मुकेश जोशी

  अंततोगत्वा चारे वाले ही सत्ता की भैंस ले गए| अब वे हैं, उनका परिवार है, और पूरे पांच साल भैंस की सवारी है, अब जब भी भैंस अपनी पूँछ उठाएगी गोबर ही करेगी कोई गाना तो नहीं गाएगी| कभी लगा था कि साम्प्रदायिक ताकतों से पिंड छुड़ाकर सुशासन बाबू अब बिहार में सच्चा समाजवाद ले आयेंगे पर वे तो 'परिवारवाद' की गोद में जा बैठे| बड़का डिप्टी सीएम हुई गवा अउर छुटका मंत्री… बिटिया के लिए भी किसी बड़े पद की तलाश जारी है| सरकारी बंगलों पर कब्जों के लिए जो 'समाजवादी मारकाट' मची वो दुनिया ने देख ही ली है|

फेस बुक पर बर्थ डे –मुकेश जोशी |

फेस बुक पर बर्थ डे –मुकेश जोशी |
[नईदुनिया ६ नवम्बर १५ में प्रकाशित] 

जब से ये मुआ फेसबुक आया है जिंदगी बस फेसबुक ही बन कर रह गई है| अभी जकरबर्ग दिल्ली आये थे उनसे 'कैंडी कृष सागा' से आतंकित फेसबुकियों ने इस महामर्ज को हटाने की मांग

तो की पर मार्क ने कोई रिमार्क तक नहीं किया इस 'खतरनाक बीमारी' पर| अगर कभी जकरबर्ग इधर हमारे गांव-खेड़ों तरफ भी आते तो खाकसार उनसे ये तो पूछ ही लेता कि महाराज आपने नई पीढ़ी के हाथ में ये कौन सा झुनझुना पकड़ा दिया जिससे सारी दुनिया ही इस 'चेहरे की किताब' (फेसबुक) में घुसी नज़र आ रही है| जमाने भर की तमाम खुशियां- दुःख, चिन्ताएं,विचार, घटना-दुर्घटनाएं, सम्मान (जिन्हें पाकर लेखक-कलाकार आज अपमानित महसूस कर रहे हैं) अपमान (जिन लेखक-कलाकारों को तमाम योग्यताएं रखने के बावजूद सरकारी सम्मान नहीं मिल सके) सब कुछ फेसबुक पर हाज़िर है बस एक क्लिक पर|

सयानी होती बेटी - मुकेश जोशी

सयानी होती बेटी - मुकेश जोशी 
दसवीं पास होते ही बेटी की फरमाइश
कोचिंग पर जाना पड़ेगा पापा ...गाड़ी चाहिए और मोबाइल भी

पिता की चिंता - मुकेश जोशी

पिता की चिंता - मुकेश जोशी 
शाम ढलने को होती है तब लौटता है
मेरा बेटा /थका हारा और उदास