चोर-पुलिस
मौसेरे भाई -- मुकेश जोशी.
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पने कैशोर्य में पिताजी और हम तीन भाइयों के
बीच एक अदद साइकिल ही लोकल ट्रांसपोर्टेशन का इकलौता साधन हुआ करती थी, पिताजी अगर साइकिल लेकर निकललिए तो ज़ाहिर है
हम भाइयों को 'पदयात्रा'
ही करना पड़ती थी| उस दौर में टेम्पो तांगे भी 'अफोर्ड' नहीं कर सकते थे| बड़ा होने के नाते पिताजी के बाद साइकिल पर मेरा पहला हक़ बनता था, सो उसी हक़ के चलते एक बार साइकिल मेरे खाते में बाज़ार तो गई पर घर वापस
नहीं आ सकी| मैं किराने की दूकान पर पुडियाएं बंधवाने में लगा रहा और
मेरे नीचे से ही कोई हमारी इकलौती साइकिल
सरका कर चल दिया|

