हमसे भूल हो गई ...-मुकेश जोशी (नईदुनिया अधबीच में प्रकाशित)
पचास के दशक में विरहिणी नायिका द्वारा की गई ये
मार्मिक अपील----"भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना..ज़माना खराब है भुला नहीं देना
...." |
आज तक भी हम हिन्दुस्तानियों की भूलने बेकार आदत को सुधर
नहीं पाई है, हम हर बात भूलने में माहिर
हैं| "भूल गया"
हमारा राष्ट्रीय जुमला सा बन कर रह गया है| हम हमेशा बेकार की बातें याद रखते हैं, और काम की तथा जरूरी बातें, अक्सर भूल जाया करते हैं|
दरअसल ये भूलने की आदत हमें बचपन से ही पड जाती है| जब परीक्षाओं में घर से रात-रात भर 'घोटा' (रट्टा) लगाने के बाद भी सुबह 'प्रश्न पत्र' सामने आते ही हम 'उत्तर' भूल जाते हैं, फिर 'जैसे तैसे' काम चलाकर डिग्री
हांसिल कर पाते हैं|
