इधर आसमान मे मेघों का नर्तन प्रारम्भ हुआ नहीं कि 'उनका' मन-मयूर भी नर्तन करने लगता है...उनके 'कर' जो कमल कहलाते ही नहीं आमंत्रण पत्रों मे लिखे भी जाते हैं जबर्दस्त तरीके से कुलबुलाने लग जाते हैं इस
तांक झांक करना फितरत है, मजा है, | जीवन की सच्चाइयों से चुटीले अंदाज में रूबरू होना ही तांक झाँक है| आप भी आमंत्रित हैं आइये अपने लेख, व्यंग, कवितायेँ, या वह जो कुछ जिसे पड़ने के लिए पाठक मजबूर हो जाएँ| अपने लेख अदि {स्वयं के स्वरचित है शपथ सहित} प्रेषित करें| प्रेषण पता "हमारे बारे में" प्रष्ट पर देखें|
बीती सदी की सबसे चमत्कारिक घटना ये हुई - मुकेश जोशी
बीती सदी की
सबसे चमत्कारिक घटना ये हुई कि,
सदी ने मुझे जन्मा
स्वर्ग में भी देवताओं को गुदगुदा रहे होंगे पंडित ओम व्यास
8 जुलाई 2009 की वो काली रात जब भीषण दुर्घटना मे गंभीर रूप से ज़ख्मी देश के जाने माने कवि पंडित ओम व्यास 'ओम' मौत से चल रही जंग मे धीरे धीरे जीत की तरफ बढ़ रहे थे ... उम्मीदों से भरे परिजनों को ही नहीं चिकित्सकों तक को लगने लगा था कि ओमजी वापस लौट आएंगे तब यमदूत दबे पाँव आए और चुपके से उन्हे ले गए अपने साथ और छोड़ गए हजारों अपनों तथा चाहने वालों की बड़ी फौज को सिर्फ विलाप करते हुए ....
चाँद पर बाग ....दिल बाग बाग .....
अमेरिकी सांसदों के चांद पर एक नेशनल पार्क बनाने के अति महत्वाकांक्षी प्रस्ताव की खबर सुनकर वाकई दिल बाग-बाग हो चला है .....मन तो अभी कर रहा है कि...".चलो दिलदार चलो ....चांद के पार चलो ...".या अपनी भी कोई प्रेमिका वगैरह हो तो गायें -
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