घाट पर तांक झांक -मुकेश जोशी

घाट पर  तांक झांक  -मुकेश जोशी
जब सारी दुनिया शाही स्नानके लिए कुम्भ नगरी की तरफ भाग रही हो, तो मैं यहीं का यही रहकर जनरल स्नान भी न कर पाऊं तो लानत है मुझपे?
शाही स्नान तो मैं कर नहीं सकता वो तो साधु-संतों का होता है, ऐसा सुना था मैंने या  फिर राजे रजवाड़ों का और जब शाहलोग ही दलित स्नानकी बात करने लगें तो अपना तो जनरल स्नान ही भला!
 लिहाजा अपने राम भी चल दिए बगल में गमछा दबा कर स्नान करने!